Sukhmani Sahib Shabdarth Samet | सुखमनी साहिब शब्दार्थ समेत PDF

सुखमनी साहिब शब्दार्थ समेत, अज्ञात के द्वारा लिखी गयी एक पुस्तक है। यह पुस्तक हिंदी भाषा में लिखित है। इस पुस्तक का कुल भार 2 MB है एवं कुल पृष्ठों की संख्या 209 है। नीचे दिए हुए डाउनलोड बटन द्वारा आप इस पुस्तक को डाउनलोड कर सकते है।  पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती है। यह हमारा ज्ञान बढ़ाने के साथ साथ जीवन में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। हमारे वेबसाइट JaiHindi पर आपको मुफ्त में अनेको पुस्तके मिल जाएँगी। आप उन्हें मुफ्त में पढ़े और अपना ज्ञान बढ़ाये।

Writer (लेखक ) अज्ञात
Book Language ( पुस्तक की भाषा ) हिंदी
Book Size (पुस्तक का साइज़ )
2 MB
Total Pages (कुल पृष्ठ)
209
Book Category (पुस्तक श्रेणी) Educational / शिक्षात्मक 

पुस्तक का एक मशीनी अनुवादित अंश

प्रभु स्मरगा करने से यह जीव पूर्वाश होता है। प्रभु स्मरम में मन की मज़ दूर होती है। (कारण रि) अमृत नाम याकर मन में बनता है। प्रभु जी सन्तों की रसना पर बसते हैं। नानक ! मैं सन्तों के दामों का दास है। जो प्रभु का स्मरण करते हैं यह दृश्य-शाजी हैं। जो प्रमु का स्मरण करते है यह पतवन्ते है। जो प्रभु का स्मरण करते है यह लोग माननीय है। जो प्रभु का स्मरण करते हैं वह लोग प्रधान है। जो प्रभु का रमरण कर यह बाग मुहता है। जो प्रभु का रमरण कररी है यह सब के राज है। जो प्रनु का रमरण करते हैं वह सुभी हैं। सो प्रभु का रनरण करते हैं गह निजीयी है। प्रभु रमरण में वह लोग लगे है जिन पर रम प्रभु दयानु हैं। दम उन सजनों की पा धूलि को मोगते हैं ॥५॥ 

जो प्रभु का स्मरण करते है सो परोपकारी है। जो प्रभु का स्मरण करते है मै उन पर मरने आप को न्योछावर करता। जो प्रभु का स्मरण करते हैं यह मुन्दर-मुरा। जो प्रभु स्मरण करते हैं उन्हो ने अपने मन को जीता है। जो प्रभु स्मरण करते हैं उन की मर्यादा निर्मल है। जो प्रभु स्मरण करते हैं उन को अधिक सुख प्राप्त होते हैं। जो प्रभु का स्मरण करते हैं सो प्रभु ये समीप बसते है। सन्तों की कृपा कर वह सर्वदा जाग रहे हैं। है नानक ! प्रभु स्मरण (इस जीव को) पूर्ण भाग से प्राप्त होता है॥६॥ प्रभु स्मरण करने से सब कार्य पूर्ण होते हैं। प्रभु स्मरण करने से कभी पश्चाताप नहीं होता। प्रभु स्मरण करने से यह जीव वाशी कर भी प्रभु-गृशां को गाता है।

प्रभु स्मरण करने से चित्त-वृति प्रभु में समाती है। प्रभु स्मरण करने से यह जीव मचल-मासन होता है। प्रभु स्मरण करने से हृदय कमल प्रफुल्लित होता है। प्रभु स्मरण करने से निजानन्द का लाभ होता है। प्रभु रमरण करने से जो सुख प्राप्त होता है उस के अन्त का पार नहीं है। प्रभु स्मरण वह लोग करते हैं जिन पर स्वयं प्रभु की कृपा है। श्री गुरू जी कहते हैं कि मैं भी उन की शरण में पडा है | हरि स्मरण कर भात शन ससार मै प्रगट हुए हैं। हरि स्मरण कर (ऋषियों ने) घेद उत्पन्न किए हैं।

डिस्क्लेमर – यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं। 

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