Shree Ramcharitmanas (श्री रामचरितमानस) PDF – Hanuman Prasad Poddar

श्री रामचरितमानस का स्थान हिंदी-साहित्य में ही नहीं, जगत्के साहित्य में निराला है । इसके जोड़ का, ऐसा ही सर्वाङ्ग सुन्दर, उत्तम काव्य के लक्षणों से युक्त, साहित्य के सभी रसों का आस्वादन कराने वाला, कान्य कला की दृष्टिसे भी सर्वोच्च कोटि का तथा आदर्श गार्हस्थ्य-जीवन, आदर्श राजधर्म, आदर्श पारिवारिक जीवन, आदर्श पातिव्रत धर्म, आदर्श भ्रातृधर्म के साथ-साथ सर्वोच्च भक्ति-ज्ञान, त्याग, वैराग्य तथा सदाचार की शिक्षा देने वाला, स्त्री-पुरुष, बालक-वृद्ध और युवा सबके लिये समान उपयोगी एवं सर्वोपरि सगुण-साकार भगवान्की आदर्श -मानव लीला तथा उनके गुण, प्रभाव, रहस्य तथा प्रेमके गहन तत्त्व को अत्यन्त सरल, रोचक एवं ओजखी शब्दों में व्यक्त करने वाला कोई दूसरा ग्रन्थ हिंदी भाषा में ही नहीं, कदाचित् संसार की किसी भाषा में आज तक नहीं लिखा गया ।

यही कारण है कि जिस चावसे गरीब-अमीर, शिक्षित-अशिक्षित, गृहस्थ संन्यासी, स्त्री-पुरुष, बालक-वृद्ध–सभी श्रेणी के लोग इस ग्रन्थरल को पढ़ते हैं, उतने चाव से और किसी अन्य को नहीं पढ़ते तथा भक्ति, ज्ञान, नीति, सदाचार का जितना प्रचार जनतामें इस ग्रन्थसे हुआ है उतना कदाचित् और किसी ग्रन्थ से नहीं हुआ। जिस ग्रन्थ का जगत में इतना मान हो, उसके अनेकों संस्करणों का छपना तथा उस पर अनेकों टीकाओं का लिखा जाना स्वाभाविक ही है । इस नियमके . अनुसार रामचरितमानस के भी आजतक सैकड़ों संस्करण छप चुके हैं । 

यह पुस्तक हिंदी भाषा में लिखित है। इस पुस्तक का कुल भार 43.83 MB है एवं कुल पृष्ठों की संख्या 1022 है। निचे दिए हुए डाउनलोड बटन द्वारा आप इस पुस्तक को डाउनलोड कर सकते है।  पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती है। यह हमारा ज्ञान बढ़ाने के साथ साथ जीवन में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। हमारे वेबसाइट JaiHindi पर आपको मुफ्त में अनेको पुस्तके मिल जाएँगी। आप उन्हें मुफ्त में पढ़े और अपना ज्ञान बढ़ाये।

Writer (लेखक ) हनुमान प्रसाद पोद्दार
Book Language ( पुस्तक की भाषा ) Hindi | हिंदी
Book Size (पुस्तक का साइज़ )
43.83 MB
Total Pages (कुल पृष्ठ) 1022
Book Category (पुस्तक श्रेणी) Religious / धार्मिक

गोस्वामी तुलसीदास जी का संक्षिप्त जीवन परिचय

प्रयाग के पास बाँदा जिले में राजापुर नामक एक ग्राम है, वहाँ आत्माराम दूबे नागके एक प्रतिष्ठित सरयूगरीण ब्राह्मण रहते थे। उनकी धर्म पत्नीका नाम हुलसी था। संवत् 1554 फी श्रावण शक्का सप्तमी के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र मै इन्हीं भाग्यवान् दम्पति के यहाँ बारह महीने तक गर्भ रहनेके पश्चात् गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म हुआ। जन्मते समय बालक तुलसीदास रोये नहीं, किन्तु उनके मुख से गमका’ शब्द निकला। उनके मुख में बत्तीसों दाँत मौजूद थे । उनका डील-डौल पाँच वर्ष के बालक का-सा था । इस प्रकारके अद्भुत बालक को देखकर पिता अमङ्गल की शङ्कासे भयभीत हो गये और उसके सम्बन्ध में कई प्रकार की कलनाएँ करने लगे। माता हुलसीको यह देखकर बड़ी चिन्ता हुई।

उन्होंने बालकके अनिष्ट को आशङ्का से दशमी की रात को नवजात शिशु को अपनी दासी के साथ उसके ससुराल भेज दिया और दूसरे दिन स्वयं इस असार संसार से चल बसी । दासी ने, जिसका नाम चुनियाँ था, बड़े प्रेमसे बालक का पालन-पोषण किया। जब तुलसीदास लगभग साढ़े पाँच वर्ष के हुए, चुनियाँ का भी देहान्त हो गया. अब तो बालक अनाथ हो गया । वह द्वार-द्वार भटकने लगा । इस पर जगजननी पार्वती को उस होनहार बालक पर दया आयी । वे ब्राह्मणी का वेष धारण कर प्रतिदिन उसके पास जाती और उसे अपने हाथों भोजन करा जाती।

इधर भगवान् शङ्कर जी की प्रेरणासे रामशैल पर रहने वाले श्रीअनन्तानन्द जी के प्रिय शिष्य श्रीनरहर्यानन्द जी ने इस बालक को ढूंढ निकाला और उसका नाम राम बोला रक्खा । उसे वे अयोध्या ले गये और वहाँ संवत्  माघ शुक्ला पञ्चमी शुक्रवार को उसका योपवीत संस्कार कराया । विना सिखाये ही बालक राम बोला ने गायत्री-मंत्र का उच्चारण किया। जिसे देखकर सब लोग चकित हो गये । इसके बाद नरहरि स्वामी ने वैष्णवों के पाँच संस्कार करके गम बोला को राम-म-त्रकी दीक्षा दी और अयोध्या ही में रहकर उन्हें विद्याध्ययन कराने लगे। बालक राम बोला को बुद्धि बड़ी प्रखर यो । एक बार गुरु मुख से जो सुन लेते थे, उन्हें वह कण्ठस्थ हो जाता था । वहाँ से कुछ दिन बाद गुरु-शिष्य दोनों सूकर क्षेत्र (सोरों) पहुँचे । वहाँ श्रीनरहरि जी ने तुलमीदास को रामचरित सुनाया:। कुछ दिन बाद ये काशी चले आये। काशी में शेष सनातन जी के पास रहकर तुलसीदास ने पंद्रह वर्ष तक वेद-वेदाङ्ग का अध्ययन किया।

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